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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 15
धृत्वाहं त्वा स्वहस्तेन नीत्वा विजयपत्तनम्। अल्लीशाहस्य पुरो नामयित्वा शिरस्तव ।। प्रणिपत्य च विज्ञाप्य तं प्रतापिनमीश्वरम्। दास्यामि वैभवं तुभ्यं भूयो भूयस्तरं नृप ।।
मैं तुझे अपने हाथ से पकड़कर तथा बिजापुर ले जाकर अल्लीशाह के सामने तेरे मस्तक को झुकवाते हुए उस प्रतापी स्वामी से हाथ जोड़कर निवेदन करूंगा और हे राजा! तुझे फिर उससे अत्यन्त वैभव को प्राप्त करवाउंगा।
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