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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 14
तव्द्य दुर्विनीतं त्वां विनेतुमहमागतः । प्रयच्छ पर्वतानेतान् गृध्नुतां त्यज मां भज ।।
अतः आज मैं दुर्विनीत तुझको दण्ड देने के लिए आया हूं। यह किला मुझे दें और मेरी शरण में आ जा।
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