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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 13
येदिलं कुतुबं वापि दिल्लीन्द्रं वा महौजसम्। न सेवसे न मनुषे तनुषे गर्वमात्मनि।।
आदिलशाह की कुतुबशाह की या फिर महाबलवान् दिल्लीपति की भी सेवा नहीं करता है और नहीं उन्हें मानता है और अपने पर ही गर्व करता है।
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