ततः स्वरेण तारेण मुषादर्शितसौहृदः। प्रतिकूलेन विधिना हतः स तमवोचत ।।
तत्पश्चात् मिथ्या स्नेह दिखाकर, प्रतिकूल भाग्य से हत वह अफजखान उससे ऊंचे स्वर में बोला।
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