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शिवभारतम् • अध्याय 21 • श्लोक 1
कवीन्द्र उवाच - अथो मिथो दर्शनार्थं भूशमुद्यतयोस्तयोः । अप्यस्तत्रधियोस्तत्र निजनीतिसमेतयोः ।। यथा दूतमुखेनैव नियमः समजायत। कथयामि तथा सर्वं शृणुत द्विजसत्तमाः ।।
कवीन्द्र बोला - तत्पश्चात् एक दूसरे से मिलने के लिए अत्यन्त उत्सुक, उस कार्य में तत्पर बुद्धिवाले एवं अपनी-अपनी राजनीति से व्यवहार करने वाले उन दोनों दूतों के बीच जैसा करार हुआ था वह सब बताता हूं, हे पण्डितों ध्यान से सुनो!
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