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शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 6
त्वं यदा वासुदेवोऽभूस्तदाहं नन्दमन्दिरे। त्रिदिवात्तव साहाय्यविधानार्थमवातरम्।। इदानीमपि दैत्यारे विमुच्य तुलजापुरम्। उपेतास्मीति जानीति साहाय्यायैव ते स्वयम्।।
उत्तम कवच को धारण किया हुआ, शिवाजी राजे भोसले, कर्णाभरण को धारण करने वाले, सफेद पगड़ी से एवं केसर के छिड़काव किये गए अंगरखे से वह अत्यन्तं सुशोभित हो रहा था। उस बज्रयुक्त शरीर के लिए उस कवच की क्या जरूरत है?
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