इस प्रकार उन यवनों द्वारा अपने मन में चिन्तित कपट को जानकर वह शिवाजी उन सबका फल उसको युद्ध में देने के लिए किस प्रकार सज्ज हुआ, यह सब मैं बताऊंगा, उसके यश का मधुर वृतांत ही अमृत है, उसके आगे अमृत की बातें व्यर्थ है।
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