उस अफजलखान की सेना से वहाँ बुलवाये गए व्यापारियों से उसने सम्पूर्ण रत्नों को ले लिया और उन सबको अपने पास ही रख लिया। तब उन लालची एवं दैव के कारण से विनष्ट बुद्धि वाले मूर्ख व्यापारियों ने, अत्यन्त लालच की आशा से हम पर्वत की चोटी पर चारों ओर से घिर गये हैं, इसको नहीं पहचाना।
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