मुसेखानायां कुशाय याकुतायांबराय च । तथा हसन खानाय परेभ्यश्च पृथक् पृथक् ॥ तथैव मंबराजाय पितृव्याय गरीयसे । तत्तद्रत्नपरीक्षा च कारणीयास्ति वै पुनः ॥
मुसेखान, अंकुशखान, याकुत, अंबर उसी प्रकार हसनखान और अन्य सभी को तथा बड़े चाचा मंबाजी राजे, इसको भी पृथक् पृथक् उपहार देने चाहिए और सभी प्रकार के रत्नों की परीक्षा करवा लेनी चाहिए।
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