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शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 35
देयान्युपायनान्यस्मै प्राप्तायातिथये मया । निजनीत्युनुरोधेन तत्सुतेभ्योऽपि सर्वथा ॥
इस आये हुए अतिथि को एवं उसके पुत्रों को भी किसी प्रकार मुझे अपने शिष्टाचार का अनुसरण करके उपहार देना चाहिए।
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