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शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 30
ततः कुकुद्वतीकूले कीचकब्रजसंकुले। निरुत्सवा इव भयादवात्सुर्मिलिताः परे ॥
तत्पश्चात् भय से मानो उत्साहरहित होकर बास के वृक्षों से व्याप्त कुमुद्दती के तट पर शत्रु ने आश्रय प्राप्त किया।
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