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शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 3
अथ तद्दर्शनोल्लासभूशसंजातसंभ्रमः । प्रश्रयेणादिमायां मामनंसीत् स मुहुर्मुहुः ।।
इस प्रकार करार करके एवं अंदर से कपटभाव से युक्त होकर एक-दूसरे से मिलने के इच्छुक वे दोनों उस समय सुशोभित हुए।
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