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शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 28
उपेत्य जयवल्लीं तामसावफजलो बली। इयं मया गृहीतेति निजे चेतस्यचिंतयत्।।
उस बलवान् अफजलखान के उस जयवल्ली के पास आने पर यह मेरे हाथों में आ गई, ऐसा वह अपने में चिंतन करने लगा।
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