तत्पश्चात् पर्वत के मध्यभाग में स्थित गुफा के समान गहरी, सिंह, बाघ, सुअर, भालू, इनके द्वारा आश्रित, इंद्रनीलमा के समान काली झाड़ियों से युक्त, मानो वज्र ही हो, अंधकाररूपी सागर में उत्पन्न हुई मानों पातालभूमि हो, तीनों लोगों को जीतने वाले उत्कृष्ट गुणशाली शिवाती के द्वारा नित्य रक्षित, सूर्य के किरणों के द्वारा तल को स्पर्श न की हुई, सघन छाया से युक्त, ऐसी उस जयवल्ली को पास में आकर अफजलखान ने देखा।
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