मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 15
रहस्यमिव राजेन्द्रो रहस्तानीत्युपादिशत्। परोऽपि सेनया साथै तं पंथानमथासदत् ।। विसंकटदृषद्धष्टजानुभ्रश्यद्दत्वचः। अध्यारोहन् करटिनः कथंचिदथ तं गिरिम् ।।
मैं तुझे अपने हाथ से पकड़कर तथा बिजापुर ले जाकर, अल्लीशाह के समाने तेरे मस्तक को झुकवाते हुए उस प्रतापी स्वामी से हाथ जोड़कर निवेदन करूंगा और हे राजा, तुझे फिर उससे अत्यन्तं वैभव को प्राप्त करवाउंगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें