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शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 11
तदद्य मन्नियोगेन युष्माभिरनिवारिता। संपश्यत्वटवीमेतामेता परपताकिनी ।।
तत्पश्चात्, मिथ्या स्नेह दिखाकर, प्रतिकूल भाग्य से हत वह अफजलखान उससे उंचे स्वर में बोला।
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