मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 20 • श्लोक 1
कवीन्द्र उवाच - अत्रान्तरे भगवती तुलजा भक्तवत्सला। स्वं रूपं दर्शयामास शिवाय जगतीजिते ।। कल्पवल्लीमिव नवां पुरस्तादथ तां स्थिताम्। सरत्नाभरणां शोणचरणां चंपकप्रभाम् ।।
कवीन्द्र बोले - तत्पश्चात् एक-दूसरे से मिलने के लिए अत्यन्त उत्सुक, उस कार्य में तत्पर बुद्धिवालें एवं अपनी-अपनी राजनीति से व्यवहार करने वाले उन दोनों दूतों के द्वारा जैसा करार हुआ था, वैसा सब बताता हू। हे पण्डितों ध्यान से सुनो!
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें