कवीन्द्र बोले - तत्पश्चात् एक-दूसरे से मिलने के लिए अत्यन्त उत्सुक, उस कार्य में तत्पर बुद्धिवालें एवं अपनी-अपनी राजनीति से व्यवहार करने वाले उन दोनों दूतों के द्वारा जैसा करार हुआ था, वैसा सब बताता हू। हे पण्डितों ध्यान से सुनो!
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