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शिवभारतम् • अध्याय 2 • श्लोक 8
अथ विठ्ठलराजस्तो भ्रातृभार्यां तथाविधाम्। भर्तृशोकमराकांता क्रन्दन्तीं कुररीमिव ।।
फिर, उनकी स्वयं की आँखें आँसू से परिपूर्ण होने पर भी वे महान बुद्धिमान विठ्ठल जी पतिशोक से भयभीत तथा चकवी पक्षी की तरह विलाप कर रही,
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