स तया च तया तन्व्या [नुषया सेवितान्वहम्।
विनीताभ्यां च पुत्राभ्यामुमा लेभे परां मुदम्।।
सेवा करने वाली दुर्गा एवं सुंदर जिजाबाई, इन दोनों बहुओं से तथा अपने दोनों विनयशील बेटों से उमा को अतिशय आनंद की प्राप्ति होने लगी।
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