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शिवभारतम् • अध्याय 2 • श्लोक 61
वन्दमानाममोधाभिराशीर्भिरभिनन्दिताम्। स्नुषामिमामथ चश्रूः सकौतुकमलोकत।।
जब उसने अभिवादन किया, तो उसको अनेक प्रकार के फलदायी आशीर्वाद मिलें। उस समय सास ने अपनी बहू को बड़ी कौतूहल की दृष्टि से उसकी ओर देखा।
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