सुवृन्ते स्वर्णताटंके पर्यन्तप्रोतमौक्तिके।
दधतीं दीधितिमतीं सरत्नां च ललाटिकाम्।।
माथे पर लटकते हुए रत्न, कानों के पास दिखाई देते मोतियों से गुंथे हुए कुंडल,
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