स च तां प्रेयसीं लब्ध्वा पद्महस्ता भुवः श्रियम्।
लावण्यवैभववतीमतीव महितान्वयाम् ।।
उस उच्च कुल की सुंदरी के कमल की तरह हाथ मानो धरती की शोभा हो। उसके चिकने, सुन्दर, काले बाल नितंब तक लुढ़क रहे थे। उसके भाल को देखकर ऐसा लग रहा था मानो अर्धचंद्राकार हो तथा उसकी भौहें धनुष की तरह थीं।
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