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शिवभारतम् • अध्याय 2 • श्लोक 45
सा तं महाशयं प्राप्य बिभ्रती वपुरुज्वलम्। गंगेव गुणगंभीरा व्यराजत महोदधिम् ।।
जैसे शुभ्र एवं गहरी गंगा समुद्र से सुशोभित होती हैं, वैसे ही तेज पुंज से शोभायमान शरीरवाली गुणवती जीजाबाई, गुण गंभीर शाहजी को प्राप्त करके सुशोभित होने लगीं।
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