इति विठ्ठलराजस्तां पर्याश्वासयदात्मनः।
स्थित्यर्थमन्ववायस्य राज्यस्य च विशेषतः ॥
विठ्ठल जी ने उसे इस तरह से उसके वंश और विशेष रूप से राज्य की भलाई के लिए सांत्वना दी।
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