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शिवभारतम् • अध्याय 2 • श्लोक 20
कृतघ्नतामिव दधद्वपुष्मन्तमये वपुः । नानुयाति जगत्यस्मिन् तस्मात् कश्चिन्न कस्यचित्।।
लेकिन, मानो कृतघ्नता के कारण यह शरीर किसी के साथ नहीं जाता! इसलिए इस संसार में कोई किसी का नहीं होता है यही सत्य है।
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