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शिवभारतम् • अध्याय 2 • श्लोक 18
शिरीषपुष्पमृदुले शयनीये सुशोभने। शायितं नीरशिशिराशीरव्यजनवीजितम्।।
शिरीष के फूल की तरह कोमल सुन्दर शय्या पर शयन कराया और जल छिड़के हुए शीतल शिशु के पंखे से हवा की।
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