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शिवभारतम् • अध्याय 2 • श्लोक 17
कालागुरुक्षोदलिप्तधूपवर्तिसुधूपिते। रम्ये हर्म्यतले दीव्यन्मणिदीधितिदीपिते ।।
काले चन्दन के चूर्ण से बनी अगरबत्ती की सुगन्ध से सुगन्धित और दिव्य रत्नों से अलंकृत रमणीय महल में
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