वनीमिमां ते पृतना प्रतनामतनीयसीम्। पश्यन्ती सुतलच्छाया सुखान्यनुभविष्यति ।।
इस प्राचीन एवं विशाल और अन्य को देखकर आपकी सेना पाताल की छाया के सुख का अनुभव करेगी।
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