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शिवभारतम् • अध्याय 19 • श्लोक 5
तवागमनमेवेतः साम्प्रतं वेद्यि साम्प्रतम्। अभयं मम तेनैव भवितापि च वैभवम् ।।
आपका यहां आना ही संप्रति योग्य है ऐसा मुझे लगता है और उसके कारण से ही मुझे निर्भयता प्राप्त होकर मेरा वैभव भी वृद्धि को प्राप्त होगा।
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