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शिवभारतम् • अध्याय 19 • श्लोक 35
धावद्वाहखुराञ्चलैर्विदलितं कार्णाटकानां बलम्। तत्तत्स्थानभिदा च सम्प्रति पराभूतं सुराणां कुलम्। तं सर्वोन्नतमन्तकोऽपि सहसा कोपानलव्याकुलम्। मां दृष्ट्वा समया मया सह भयाद्धताद्य सन्धास्यति ।।
जिसने दौड़ने वाले घोड़ों के खुरो से कर्नाटक के राजाओं की सेनाओं को विनष्ट किया जिसने सभी स्थानों को फोड़कर संप्रति सभी स्थानों को भ्रष्ट किया है। सर्वश्रेष्ठ एवं क्रोधाग्नि से संतप्त ऐसे मुझे समीप आया हुआ देखकर प्रत्यक्ष यमराज भी भय से मेरे साथ संधि करेगा।
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