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शिवभारतम् • अध्याय 19 • श्लोक 34
यदमानुषकर्मेति तं प्रशंसथ मानुषम्। अवैमि तदविज्ञाय मदीयमपि पौरुषम् ।।
अमानवीय कृत्यों को करने वाले ऐसे जिस मनुष्य की प्रशंसा कर रहे हो तो आप मेरे पराक्रम को ना पहचानने के कारण कर रहे हो ऐसा मुझे लगता है।
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