अतुलं ते बाहुबलं बलं च तुलितानलम्। अलङ्कृतं क्षितितलं त्वया त्वयि न हि च्छलम् ।।
आप में बाहुबल अतुलनीय है आपका पराक्रम अग्नि के समान है आपने पृथ्वी को अलंकृत किया है और आप में मूलतः ही कपट नहीं है।
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