श्लिष्टाग्रानोकहशतैः श्लिष्टारोहावरोहया। स्तम्बेरमाः कथं यान्तु तया पर्वतपद्यया ।।
जिसका मुंह सैकड़ों वृक्षों से व्याप्त है एवं जो आरोहण अवरोहण के लिए अत्यधिक संकुचित है ऐसे पर्वत मार्ग से हाथी किस प्रकार जा सकते हैं।
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