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शिवभारतम् • अध्याय 19 • श्लोक 26
उपाहरतु सर्वस्वमात्मीयं भवतो मुदे। निजां नामयतु ग्रीवां नमन्निह पदे पदे।।
उसको आप को संतुष्ट करने के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करना चाहिए और आपको पग पग पर मुजरा देते हुए अपनी गर्दन को आपके सामने झुकाना चाहिए।
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