प्रशस्तेन स्वचित्तेन विश्वस्तः स यदि त्वयि । तर्हि सद्यः समायातु जयवल्लीवनाद्बहिः ।।
उसने यदि तुम पर शुद्ध अंतःकरण से विश्वास किया है तो उसको जयवल्ली के वन से बाहर तत्काल आना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।