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शिवभारतम् • अध्याय 19 • श्लोक 25
प्रशस्तेन स्वचित्तेन विश्वस्तः स यदि त्वयि । तर्हि सद्यः समायातु जयवल्लीवनाद्बहिः ।।
उसने यदि तुम पर शुद्ध अंतःकरण से विश्वास किया है तो उसको जयवल्ली के वन से बाहर तत्काल आना चाहिए।
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