इति बुवाणमास्थानभ्राजमानासनस्थितम्। दैवध्वस्तधियस्ते तु न तं प्रत्याचचक्षिरे ।।
दरबार में शोभायमान आसन पर बैठकर इस प्रकार बोलने वाले अफजल खान का निषेध दुर्देव से विनष्ट बुद्धि बाले उन सैनिकों ने नहीं किया।
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