क्षितिमुत्खातयिष्यामि पातयिष्यामि पर्वतान्। वनानि च प्रधक्ष्यामि सद्यः क्रोधकृशानुना ।।
मेरी क्रोधाग्नि से मैं तत्काल वन को जला दूंगा भूमि को खोद दूंगा एवं पर्वतों को समतल कर दूंगा।
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