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शिवभारतम् • अध्याय 19 • श्लोक 1
कवीन्द्र उवाच - नियोजयन्स सर्वत्र दृशं प्रणिधिरुपिणीम्। पश्यत्यवहितः सर्वं शिवो बाह्रां तथान्तरम् ।। ततोऽसौ दूतमाहूय निष्णातं निजकर्मणि। प्रतिवाचमिमां तस्मै प्राहिणोत्परिपन्थिने ।।
गुप्तचर रूपी अपनी दृष्टि को सर्वत्र युक्त करके वह शिवाजी अपने राज्य के एवं पर राज्य के सभी समाचारों को दक्षता के साथ देखता था। तत्पश्चात अपने कार्य में निपुण दूत को बुलाकर उसने शत्रु को यह उत्तर भेजा।
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