जयवल्ली वशा यस्य वैराटं तस्य सर्वथा। तथा सह्याद्रिरखिलः सान्तरीपक्ष सागरः ॥ इति मत्वा स यवनस्तामेवादातुमादितः। समुद्यतो महाबाहुर्युतं वैराटमाययौ।।
जिसके अधीन जयवल्ली हैं, उसके अधीन पूर्णरूप से वैराट प्रान्त है। उसी प्रकार सम्पूर्ण सह्याद्रि एवं समुद्रतट भी है, ऐसा विचार करने पर वह महाबाहु यवन, उसको अधीन करने के लिए पूरी तैयारी के साथ शीघ्र वैराट प्रदेश आया।
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