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शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 7
तं देशं चन्द्रराजस्य महावनसमाश्रयम्। तस्मादाच्छिद्य नृपतेर्दास्यामि भवते ध्रुवम् ।। येदिलस्येति वचसा तदा सोऽपहृतव्यथः । चकाराफजलस्याभिक्रमकर्म सहायताम् ।।
विशाल वन में स्थित उस चन्द्रराज के राज्य को उस शिवाजी राजा से छिनकर तुझे अवश्य ही दूंगा। इस प्रकार आदिलशाह के कहने पर वह अपनी पीड़ा से रहित होकर उसने अफजलखान के आक्रमण के कार्यों में सहयोग किया।
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