विशाल वन में स्थित उस चन्द्रराज के राज्य को उस शिवाजी राजा से छिनकर तुझे अवश्य ही दूंगा। इस प्रकार आदिलशाह के कहने पर वह अपनी पीड़ा से रहित होकर उसने अफजलखान के आक्रमण के कार्यों में सहयोग किया।
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