चन्द्रराजपदाकांक्षी मंत्रविन्मन्त्रिभिर्युतम्। येदिलं प्रीणयामास चिरं स परिचर्यया ।।
चन्द्रराज के राज्य की आकांक्षा करने वाले उस प्रताप वर्मा ने, मन्त्रिवत् मन्त्रियों से युक्त आदिलशाह की चिरकाल तक सेवा करके उसको संतुष्ट किया।
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