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शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 38
उपनतमहितस्य पत्रलेख रहसि निशम्य तमेतमेकवीरः । स किल सकलराजलोकरने न्यधित निजे हृदि कञ्चिदेव यत्नम् ।।
शत्रुओं के आये हुए इस प्रकार के पत्र को सुनकर उस सकल राजाओं के शिरोमणि एवं अद्वितीय वीर ने अपने मन में कुछ एक उपाय बनाएं।
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