या चन्द्रराजादाच्छिद्य गृहीतानिग्रहात्त्वया। जयवल्लीमिमामल्लीशाहस्त्वां तां हि याचते ।।
जो जयवल्ली तुमने चन्द्रराज के पास से बलात् अधीन कर ली थी, वह यह जयवल्ली भी अल्लीशाह तुमसे मांग रहा है।
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