सिंह लोकं महान्तं च प्रबलं च शिलोच्चयम्। पुरन्दरं गिरि तद्वत् पुरीं चक्रावतीमपि ।। विषयं च तथा नीराभीमरथ्यन्तराश्रयम्। प्रणिपत्य प्रयच्छाशु दिल्लीन्द्रायामितौजसे ।।
सिंहगड़ और लोहगड़ ये बड़े और सुदृढ़ किले हैं, उसी प्रकार पुरंदरगड़ एवं चक्रवर्तीपुरी चाकण, नीरा और भीमा का मध्यभाग, ये सब महाबलादय, दिल्ली के बादशाह के शरण में जाकर शीघ्र ही वापस कर दो।
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