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शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 25
अफजल उवाच - विदधाति यदौद्धत्यं भवानद्य पदे पदे। तोदिलस्य हृदये भजते शल्यरूपताम् ।।
अफजलखान बोला - आज जो आजकल पग-पग पर उद्दंडता कर रहा है वह आदिलशाह के अंतःकरण में काटे की तरह चुभ रहा हैं।
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