फिर जिसका अभिप्राय गुप्त है, जिसका बाहुपराक्रम अपार है, जो शत्रुओं के लिए अजेय है, जो प्रभाव उत्साह एवं मन्त्र इन तीन शक्तियों से युक्त है, जिसका सेना-समूह तैयार है, ऐसा वह विख्यात शिवाजी जयवल्ली में अधिष्ठित होकर स्वयं युद्ध के लिए तैयार होकर बैठा है, ऐसा सुनकर उस सर्वार्थ कुशल शिवाजी को अफजलखान ने जो संदेश भेजा था। हे पण्डितों! वह मैं तुम्हें बताता हूं, सुनो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।