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शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 21
जयवल्लीवनं घोरं गृहं कण्ठीरवस्य मे। विशन्निधनमागंता द्विषन्नफजलो गजः ।।
जयवल्ली का यह सघन वन ही मुझ सिंह की गुफा है, वहां प्रवेश करने वाला यह शत्रु अफजलरूपी हाथी निश्चित ही विनाश को प्राप्त होगा।
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