मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 2
कवीन्द्र उवाच - साह‌ङ्कारश्शिवं जेतुं स कालयवनद्युतिः । यवनोऽफजलस्तूर्ण प्रस्थितः स्वामिशासनात् ।। वैराटमेव विषयं प्राविशद्येन हेतुना। तमहं संप्रवक्ष्यामि शृणुध्वं भो मनीषिणः ॥
कवीन्द्र बोले - उस घमण्डी एवं कालयवन के समान तेजस्वी अफजलखान यवन ने शिवाजी को जीतने के लिए, स्वामी की आज्ञा से शीघ्र प्रस्थान करके वैराट प्रदेश में ही किस कारण से प्रवेश किया वह मैं बताता हूं, हे पण्डितों ध्यान से सुनो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें