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शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 19
यवनानाममी वंशाः सर्वेप्यंशास्सुरद्विषाम्। जगतीं निजधर्मेण निमज्जयितुमुद्यताः ।।
यवनों के ये सभी वंश असुरों के अंश होते हैं। ये अपने धर्म के योग से पृथ्वी को डुबाना चाहते हैं।
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