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शिवभारतम् • अध्याय 18 • श्लोक 11
येदिलेन विसृष्टोऽसौ मयि रुष्टेन मानिना। करिष्यत्यात्मसदृशं पौरुषं पौरुषक्रमः ।। स एष यवनो यस्य दुर्नयेन गरीयसा। अहो कलियुगस्यास्य माहात्म्यमुपचीयते ।।
मेरे पर क्रोधित हुए उस अभिमानी आदिलशाह के द्वारा प्रेषित यह पराक्रमी अफजलखान अपने शक्ति के समान पराक्रम करेगा। अरे! जिसके अत्यन्त दुष्टता के कारण इस कलियुग का माहत्म्य वृद्धि को प्राप्त हो रहा है, वही यह यवन है।
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